दुष्यंत कुमार

NCERT Solutions for Chapter 17 गज़ल Class 11 Aroh

Book Solutions

1

आखिरी शेर में गुलमोहर की चर्चा हुई है| क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार वृक्ष से है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है? समझाकर लिखें|

Answer

गुलमोहर एक ख़ास तरह का फूलदार वृक्ष है| इसके नीचे बैठकर लोगों को ख़ुशी का अनुभव होता है| कवि ने इसका सांकेतिक प्रयोग ऐसे भारत के लिए किया गया है जिसका सपना उन्होंने देखा है| वे ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जहाँ शांति और सुख की छाया हो| इसके लिए उन्हें कुछ भी त्याग और संघर्ष करना पड़े|
गज़ल के साथ

2

पहले शेर में ‘चिराग’ शब्द एक बार बहुवचन में आया है और दूसरी बार एकवचन में| अर्थ एवं काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से इसका क्या महत्व है?

Answer

पहली बार ‘चिराग’ शब्द का बहुवचन में प्रयोग किया गया है| इसका अर्थ हर घर के खुशियों के लिए प्रयुक्त हुआ है| कवि ने वर्तमान समाज व्यवस्था पर व्यंग्य किया है जिसका उद्देश्य प्रत्येक के लिए सुख-सुविधाओं के साधन उपलब्ध कराना था|

दूसरी बार यह एकवचन में प्रयोग किया गया है जिसका अर्थ यह है कि पूरे शहर या समाज के लिए एक भी सुख-सुविधा उपलब्ध नहीं है| जिस व्यवस्था में सभी के लिए खुशियों की आशा की गई थी, वहाँ पूरा समाज एक छोटे-से सुख के लिए तरस रहा है|
गज़ल के साथ

3

ग़ज़ल के तीसरे शेर को गौर से पढ़ें| यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है?

Answer

ग़ज़ल के तीसरे शेर में कवि ने उन लोगों की तरफ इशारा किया है जो परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेते हैं| ऐसे लोग जो भाग्य पर निर्भर रहते हैं और जितना मिले उसी में संतुष्ट हो जाते हैं| इन लोगों की जीवन की आवश्यकताएँ सीमित हैं तथा कठिनाइयों को चुपचाप सह लेते हैं|
गज़ल के साथ

4

आशय स्पष्ट करें:
तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,
वे एहतियात जरूरी है इस बहर के लिए

Answer

प्रस्तुत पंक्तियों में कवि यह कहना चाहते हैं कि कोई भी शासक शायर को अपने विरूद्ध आवाज बुलंद करने नहीं देता क्योंकि ऐसा होने से उस शासन व्यवस्था के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है| यह किसी भी शासन-व्यवस्था के स्थायित्व के लिए आवशयक भी है| लेकिन जमाने में बदलाव के लिए शायरों को अपनी आवाज इस प्रकार से बुलंद करनी होगी जिससे कि उनकी आवाज जनता तक पहुँच सके|
गज़ल के साथ

1

दुष्यंत की इस ग़ज़ल का मिज़ाज बदलाव के पक्ष में है| इस कथन पर विचार करें|

Answer

इस ग़ज़ल के माध्यम से कवि दुष्यंत राजनीतिक एवं सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन लाना चाहते हैं| कवि कहते हैं कि जिस उद्देश्य से इस व्यवस्था का निर्माण किया गया था वह पूरा नहीं हुआ| समाज के लोगों के लिए सुख-सुविधा तो उपलब्ध कराना दूर, किसी एक के लिए भी सुधार नहीं किया जा सका| कवि ऐसी ही शासन-व्यवस्था के विरूद्ध अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं| वह शोषित वर्ग के लोगों के मन में क्रांति की ज्वाला सुलगाना चाहते हैं जिससे वे अपने अधिकारों तथा स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर सकें|
गज़ल के आस-पास

2

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है
दुष्यंत की ग़ज़ल का चौथा शेर पढ़ें और बताएँ कि गालिब के उपर्युक्त शेर से वह किस तरह जुड़ता है|

Answer

कवि दुष्यंत के ग़ज़ल के चौथे शेर में कवि दुष्यंत ने ईश्वर के अस्तित्व के कल्पना मात्र से व्यक्ति के आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करने की बात कही है| ईश्वर के होने का सुंदर सपना ही लोगों की आँखों को सुकून देता है| इस प्रकार शेर में कवि ने उन लोगों पर व्यंग्य किया है जो वास्तविकता से दूर कल्पना मात्र से ही दिल को खुश कर लेते हैं|

गालिब के शेर में भी स्वर्ग की वास्तविकता से सभी परिचित हैं लेकिन दिल को खुश करने के लिए उसकी सुंदर कल्पना करते हैं| इस प्रकार दोनों शेरों में वास्तविकता को परे रखकर काल्पनिक दुनिया के बारे में वर्णन किया गया है|
गज़ल के आस-पास

3

यहाँ दरख्तों के साये में धुप लगती है’ यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ नहीं मिल पाता| कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरे वाक्यों को पूरा करें|
(क) यह ऐसे नाते-रिश्तों पर लागू होता है,. ..........................
(ख) यह ऐसे विद्यालयों पर लागू होता है, ........................
(ग) यह ऐसे अस्पतालों पर लागू होता है, ..........................
(घ) यह ऐसी पुलिस व्यवस्था पर लागू होता है, ........................

Answer

(क) यह ऐसे नाते-रिश्तों पर लागू होता है, जहाँ एक-दूसरे पर विश्वास और उसके प्रति प्रेम का भाव नहीं रहता|
(ख) यह ऐसे विद्यालयों पर लागू होता है, जहाँ छात्रों को पढ़ाया नहीं जाता|
(ग) यह ऐसे अस्पतालों पर लागू होता है, जहाँ रोगियों का ठीक से इलाज नहीं होता|
(घ) यह ऐसी पुलिस व्यवस्था पर लागू होता है, जहाँ जनता की सुनवाई नहीं होती तथा लोगों को सुरक्षा नहीं मिलती|
गज़ल के आस-पास