यमराज की दिशा (Not in Syllabus)

Revision Notes for Chapter 16 यमराज की दिशा Class 10 Kshitiz

CBSE NCERT Revision Notes

1

पाठ परिचय

Answer

प्रस्तुत कविता में कवि ने सभ्यता के विकास की खतरनाक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा है कि जीवन-विरोधी ताकतें चारों तरफ़ फैलती जा रही हैं। जीवन के दुख-दर्द के बीच जीती माँ अपशकुन के रूप में जिस भय की चर्चा करती थी, अब वह सिर्फ़ दक्षिण दिशा में ही नहीं हैं, सर्वव्यापक है। सभी तरफ़ फैलते विध्वंस, हिंसा और मृत्यु के चिह्नों की ओर इंगित करके कवि इस चुनौती के सामने खड़ा होने का मौन आह्वान करता है।

2

सारांश 1

Answer

कवि कहता है कि उसकी माँ का ईश्वर के प्रति गहरा विश्वास था । वह ईश्वर पर भरोसा करके अपना जीवन किसी तरह बिताती आई थी। वह हमेशा दक्षिण की तरफ़ पैर करके सोने के लिए मना करती थी क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा है। यमराज को नाराश करना खतरे से खेलना है। कवि ने एक बार अपनी माँ से यमराज के घर का पता पूछा था? तो माँ ने कवि को यही कहा था कि यमराज का घर दक्षिण में ही है।

3

सारांश 2

Answer

उसके बाद कवि कभी भी दक्षिण की तरफ़ पैर करके नहीं सोया। वह जब भी दक्षिण की ओर जाता , उसे अपनी माँ के याद अवश्य आती। माँ अब नहीं है। पर आज जिधर भी पैर करके सोओ, वही दक्षिण दिशा हो जाती है। आज चारों ओर विध्वंस और हिंसा का साम्राज्य है।