अवतार सिंह पाश

Summary for अवतार सिंह पाश Class 11 Hindi Aroh

CBSE NCERT Revision Notes

1

पाठ परिचय 

Answer

कवि पाश की कविता ‘सबसे खतरनाक’ मूलत: पंजाबी में लिखी हुई है। इसका हिंदी अनुवाद चमन लाल ने किया है। आज के समय में सामाजिक विद्रूपताओं, अन्याय, और अत्याचार जैसी समस्याओं के कारण लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए अन्य लोगों के प्रति उन्मादित हो जाते हैं और सामाजिक न्याय को नजरअंदाज़ करते हैं। इस वातावरण में, लोग अपनी खुद की प्रगति की ओर ध्यान केंद्रित करके अपने आसपास के समस्याओं से अलग हो रहे हैं। मानव के सपने मरते जा रहे हैं। वह अपने आस-पास के दुख-दर्द को बाँटने के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है।

2

कवि परिचय

Answer

कवि पाश का जन्म मध्यवर्गीय किसान परिवार में सन 1950 में तलवंडी, जिला जालंधर में हुआ। इनका मूल नाम अवतार सिंह संधू था। इनकी शिक्षा अनियमित ढंग से स्नातक तक हुई। इनकी रचनाएँ लोगों की व्यथा, निराशा, क्रोध के भावों को इस प्रकार व्यक्त करती हैं, मानो वे कवि द्वारा स्वयं ही भोगी गई हैं। इन्होंने सिआड़, हेमज्योति, हाँक, एंटी-47 आदि पत्रिकाओं का भी संपादन किया। सन 1988 में इनकी मृत्यु हो गई।
प्रमुख रचनाएँ – लौह कथा, उड़दे बाजां मगर, साडै समियां विच, लड़नगे साथी।

3

मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती।
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती।
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती।

बैठे-बिठाए पकड़ जाना-बुरा तो हैं।
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना-बुरा तो है।
पर सबसे खतरनाक नहीं होता।

कपट के शोर में
सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है।
किसी जुगनू की लौ में पढ़ना-बुरा तो है।
मुठ्ठियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना-बुरा तो हैं।
सबसे खतरनाक नहीं होता।

Answer

सारांश 
कवि यहाँ उन स्थितियों का वर्णन कर रहा है, जो मानव को दुख तो पहुँचाती हैं, पर मानव के लिए उतनी खतरनाक नहीं होतीं। यदि मेहनत की कमाई को कोई लूट ले तो यह स्थिति इतनी खतरनाक नहीं है क्योंकि मानव मेहनत कर फिर धन कमा सकता है। पुलिस की मार भी इतनी खतरनाक नहीं है। शासन के प्रति गद्दारी का भाव तथा लालच में आकर अधिकाधिक पा लेने की लालसा भी खतरनाक नहीं होती। बिना किसी दोष के अकारण ही पकड़ा जाना मानव को हानि तो पहुँचाता है पर यह स्थिति भी इतनी नहीं कि जिसे सुधारा न जा सके। मानव का डरकर अपनी ही चुप्पी में जकड़े जाना एक बुरी स्थिति है। परंतु इसे बुरा तो कहा जा सकता है पर खतरनाक नहीं। छल-कपट के दूषित वातावरण में जब सच्ची बातें छिप जाती हैं, कोई जुगनू की लौ में पढ़ता है यानी साधनहीनता में गुजारा करता है। ये स्थितियाँ मानव और समाज के लिए बुरी हैं, परंतु खतरनाक नहीं हैं।

4

सबसे खतरनाक होता है —
मुर्दा शांति से भर जाना,
न होना तड़प का, सब सहन कर जाना।
घर से निकलना काम पर,
और काम से लौटकर घर आना।
सबसे खतरनाक होता हैं
हमारे सपनों का मर जाना।

सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी निगाह में रुकी होती हैं

Answer

सारांश
कवि कहते हैं कि सबसे खतरनाक स्थिति वह है जब मनुष्य का अंतर मृत शांति का आवरण ओढ़ लेता है यानी व्यक्ति जीवन के उल्लास और उमंग से मुँह मोड़कर निराशा और अवसाद से घिरकर सन्नाटे में जीने लगता है। समाज की बुराइयों को देख जब मनुष्य के मन में बेचैनी नहीं उठती। वह मूक दर्शक बनकर सब कुछ चुपचाप सहन करता जाता है। उसकी सीमित दिनचर्या घर से काम पर जाने और काम से घर तक लौटने में बँध जाती है। उसके सभी सपने मर जाते हैं और जीवन में कोई नयापन नहीं रह जाता है। उसकी सारी इच्छाएँ समाप्त हो जाती हैं। सबसे खतरनाक तो वह स्थिति होती है जब हमें घड़ी के चलने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि हमारी दिनचर्या तो एक ही समय पर
चलती रहती है।

5

सबसे खतरनाक वह आँख होती है —
जो सब कुछ देखती हुई भी जमी बर्फ होती है।
जिसकी नजर दुनिया को मुहब्बत से चूमना भूल जाती है।
जो चीजों से उठती अधेपन की भाप पर दुलक जाती है।
जो रोजमर्रा के क्रम को पीती हुई
एक लक्ष्यहीन दुहराव के उलटफेर में खो जाती है।

Answer

सारांश
कवि कहता है कि वह आँख सबसे खतरनाक होती है जो समाज में होने वाली प्रतिकूलता के वातावरण और अन्याय को चुपचाप संवेदनाहीन होकर उसी प्रकार देखती रहती है जैसे बर्फ़ जमी हुई हो। जिसकी नजर इस संसार को प्यार से चूमना भूल जाती है यानी जिस नजर से प्रेम और सौंदर्य की भावना समाप्त हो जाती है और हर वस्तु को संदेह और घृणा से देखती है, वह नजर खतरनाक हो जाती है। वह सबसे खतरनाक स्थिति है जब व्यक्ति चुपचाप सब कुछ विरोध किए बिना सहन करता जाता है। वह जिंदगी जो दैनिक क्रियाकलापों में संवेदनहीनता के साथ भटकती रहती है। जिसका कोई लक्ष्य नहीं है, जो लक्ष्यहीन होकर केवल अपनी दिनचर्या को पूरा करती रहती है, ऐसी जिंदगी सबसे
खतरनाक होती है।

6

सबसे खतरनाक वह चाँद होता है —
जो हर हत्याकांड के बाद
वीरान हुए आँगनों में चढ़ता है,
पर आपकी आँखों की मिचों की तरह नहीं गड़ता है।

Answer

सारांश
कवि कहते हैं वह चाँद सबसे खतरनाक है जो हत्याकांड के बाद उन आँगनों में चढ़ता है जो वीरान हो गए हैं। पर फिर भी चाँद जो आसमान में निकलकर उन वीरान स्थानों पर भी रोशनी बिखेरता है वह सबसे खतरनाक है और उससे भी खतरनाक वह स्थिति है जब कुछ लोग उस चाँद की चाँदनी का आनंद लेते हैं। ऐसे चाँद की चाँदनी लोगों की आँखों में मिर्च की तरह नहीं गड़ती। यहाँ कवि बता रहे हैं कि जब आतंकी गतिविधियों के कारण हज़ारों लोग हत्याकांडों के कारण मारे जाते हैं तो जिनके घर वीरान हो जाते हैं उनके दुखों को बाँटने की अपेक्षा लोग अपनी खुशियों में लीन रहते हैं।

7

सबसे खतरनाक वह गीत होता है —
आपके कानों तक पहुँचने के लिए
जो मरसिए पढ़ता है।
आतांकित लोगों के दरवाज़ों पर
जो गुंडे की तरह अकड़ता है।
सबसे खतरनाक वह रात होती है
जो जिंदा रूह के आसमानों पर ढलती हैं।
जिसमें सिर्फ़ उल्लू बोलते और हुआँ-हुआँ करते गीदड़।
हमेशा के औधरे बद दरवाज-चौगाठों पर चिपक जाते हैं।

Answer

सारांश
कवि का मानना है कि वह गीत खतरनाक है जो मनुष्य के हृदय में शोक की लहर दौड़ाते हैं। ये गीत मृत्यु पर गाए जाते हैं तथा भयभीत लोगों को और डराते हैं। यह स्थिति खतरनाक है जिसमें आतंक से पीड़ित लोगों के दरवाज़े पर करुण रुदन का गीत गुंडे की भाँति अकड़ता रहता है परंतु लोगों का खून नहीं खौलता। कवि कहते हैं कि जब किसी जीवित आत्मा के आसमान पर निराशा रूपी रात्रि का घना अँधेरा छा जाता है और उसमें कोई उत्साह नहीं रह जाता, ऐसी रात बहुत खतरनाक होती है। इससे कवि का मतलब है कि आतंकी गतिविधियों के पश्चात् मृत लोगों के परिवारवालों पर बड़ी भारी विपत्ति आ पड़ती है। जीवित परिवारजनों पर दुखों की काली रात आ जाती है। कोई उनके दुख को बांटने वाला नहीं होता। इस दुख की काली वीरान रात में केवल चारों ओर सन्नाटा ही सन्नाटा होता है। उसके हर कोने-चौखट पर उल्लू व गीदड़ों की तरह शोक व भय चिपक
जाते हैं जो कभी निराशा से उबरने नहीं देते।

8

सबसे खतरनाक वह दिशा होती है —
जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए।
और उसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाए।
मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती।
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती।
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती।

Answer

सारांश
सबसे खतरनाक वह स्थिति होती है जिसमें आत्मा रूपी सूरज डूब जाता है। आत्मा में कोई आस की किरण नहीं रहती। उसकी मुर्दा जैसी स्थिति हमें कहीं कोई प्रभाव छोड़ जाए तो यह स्थिति भी खतरनाक होती है। ऐसे लोगों में धूप की किरणों से आशा उत्पन्न भी हो तो मृतप्राय ही होती है। कवि का आशय है कि लोगों ने अब अन्याय को सहना ही अपनी नियति मान लिया है। स्थितियों को बदलने के लिए यदि कोई आस उठती भी है तो वह भी दुख देकर फिर दब जाती है। यही स्थिति खतरनाक है। किसी की मेहनत की कमाई लुट जाए तो वह खतरनाक नहीं होती। पुलिस की मार या गद्दारी आदि भी इतने खतरनाक नहीं होते जितने कि सपनों का मर जाना, अन्याय को सहन करना, अत्याचारों को तटस्थ होकर देखते रहना।