मेरे संग की औरतें

Revision Notes for Chapter 2 मेरे संग की औरतें Class 9 Kritika

CBSE NCERT Revision Notes

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पाठ परिचय

Answer

यह संस्मरण लेखिका मृदुला गर्ग द्वारा लिखा गया है जिसमें लेखिका ने अपने परिवार की औरतों के व्यक्तित्व और स्वभाव पर प्रकाश डाला है।

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सारांश 1

Answer

लेखिका ने अपनी नानी के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। लेखिका की नानी अनपढ़, परंपरावादी और पर्दा-प्रथा वाली औरत थीं। उनके नाना ने तो विवाह के बाद कैंब्रिज विश्वविद्यालय से बैरिस्ट्री पास की और विदेशी शान-शौकत से जिदगी बिताने लगे, परंत नानी पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अतः नानी ने अपनी पुत्री की शादी की जिम्मेदारी अपने पति के एक मित्र स्वतंत्रता सेनानी प्यारे लाल शर्मा को सौंप दीं| वे अपनी बेटी की शादी आजादी के सिपाही से करवाना चाहती हैं। नानी की मृत्यु हो गई, परंतु लेखिका की माँ का विवाह एक ऐसे पढ़े-लिखे युवक से हुआ जिसे आई० सी० एस० की परीक्षा में इसलिए बैठने नहीं दिया गया था क्योंकि वह स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेता था।

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सारांश 2

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लेखिका की माँ बहुत ही कोमल तथा सुकुमारी महिला थीं। उन्हें पति के स्वतंत्रता सेनानी होने के कारण गांधी जी के आदर्शों का पालन करते हुए तथा सादा जीवन व्यतीत करते हुए खादी पहननी पड़ती थी। लेखिका ने अपनी माँ को कभी भारतीय माँ जैसा नहीं देखा था। वे घर-परिवार और बच्चों के खान-पान आदि में ध्यान नहीं देती थीं। उन्हें पुस्तके पढ़ने और संगीत सुनने का शौक था। उनमें दो गुण मुख्य थे-पहला, कभी झूठ न बोलना और दूसरा, वे एक की गोपनीय बात को दूसरे पर जाहिर नहीं होने देती थीं। इसी कारण उन्हें घर में आदर तथा बाहरवालों से दोस्ती मिलती थी।

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सारांश 3

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लेखिका की परदादी को लीक से हटकर चलने का शौक था। उन्होंने मंदिर में जाकर विनती की कि उनकी बहू का पहला बच्चा लड़की हो। उनकी यह बात सुनकर लोग हक्वे-बक्वे से रह गए थे। लड़की पैदा होने की मन्नत माँगी और वह बात सभी को बता दी। परदादी के बारे में प्रसिद्ध था कि भगवान् उनकी जरूर सुनते हैं। वही हुआ, घर में पहली सन्तान लड़की हुई। फिर तो बार-बार की मन्नत से भगवान् ने एक के बाद एक पाँच कन्याएँ उतार दी और बेटा एक ही दिया।

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सारांश 4

Answer

एक बार हवेली के सारे मर्द किसी बारात में गये थे और महिलाएँ रतजगा मनाने एकत्र होकर नाच-गाने में लगी थीं। तभी चोर उस कमरे में घुसा जिसमें लेखिका की माँ सोई हुई थी। कुछ आहट होते ही माँजी की आँखें खुल गईं। उन्होंने पूछा कौन? तो चोर डर गया। तभी माँजी ने उसे पानी लाने को कहा। पानी लाते समय वह पहरेदार द्वारा पकड़ा गया और माँजी के सामने लाया गया। उन्होंने लोटे का आधा पानी खुद पिया और आधा चोर को पिलाया और उसे बेटा मानते हुए चोरी छोड़ खेती करने की नेक सलाह दी। उनके कहने पर तब से उसने चोरी छोड़ दी और खेती का धन्धा करने लगा।

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सारांश 5

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लेखिका की बहनों में कभी इस हीन-भावना की बात नहीं आई कि वे एक लड़की हैं। पहली लड़की जिसके लिए परदादी ने मन्नत माँगी थी वह मंजुला भगत थीं। दूसरे नंबर की लड़की खुद लेखिका मृदुला गर्ग ;घर का नाम उमाद्ध थीं। तीसरी बहन का नाम चित्रा और उसके बाद रेणु और अचला नाम की बहनें थीं। इन पाँच बहनों के बाद एक भाई राजीव था।

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सारांश 6

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लेखिका का भाई राजीव हिंदी में और अचला अंग्रेजी में लिखने लगी और रेणु विचित्र स्वभाव की थी। वह स्कूल से वापसी के समय गाड़ी में बैठने से इनकार कर देती थी और पैदल चलकर ही पसीने से तर होकर घर आती थी। उसके विचार सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ थे। वह बी.ए. पास करना भी उचित नहीं मानती थी। लेखिका की तीसरी बहन चित्रा को पढ़ने में कम तथा पढ़ाने में अधिक रुचि थी। इस कारण उसके शिष्यों से उसके कम अंक आते थे। उसने अपनी शादी के लिए एक नशर में लड़का पसंद करके ऐलान किया कि वह शादी करेगी तो उसी से और उसी के साथ उसकी शादी हुई। अचला, सबसे छोटी बहन, पत्राकारिता और अर्थशास्त्रा की छात्रा थी। उसने पिता की पसंद से शादी कर ली थी और उसे भी लिखने का रोग था। सभी ने शादी का निर्वाह भली-भाँति किया।

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सारांश 7

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लेखिका शादी के बाद बिहार के एक कस्बे, डालमिया नगर में रहने लगीं। वहीं पर वहाँ की औरतों के साथ उन्होंने नाटक भी किए। इसके बाद मैसूर राज्य के कस्बे, बागलकोट में रहीं। वहाँ लेखिका ने अपने बलबूते पर प्राइमरी स्कूल खोला, जिसमें उनके और अन्य अफसरों के बच्चों ने अपनी पढ़ाई की तथा भिन्न-भिन्न शहरों के अलग-अलग विद्यालयों में दाखिला लिया।

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सारांश 8

Answer

विद्यालय खोलकर लेखिका ने दिखा दिया कि वे अपने प्रयास में कभी असफल नहीं हो सकतीं। परंतु लेखिका स्वयं को अपनी छोटी बहन रेणु से कमतर आँकती थीं। वे एक अन्य घटना का स्मरण करते हुए लिखती हैं कि दिल्ली में 1950 के अंतिम दौर में नौ इंच तेज बारिश हुई तथा चारों तरफ पानी भर गया था। रेणु की स्कूल-बस नहीं आई थी। सबने कहा कि स्कूल बंद होगा, अतः वह स्कूल न जाए  किंतु वह नहीं मानी। अपनी धुन की पक्की वह दो मील पैदल चलकर स्कूल गई और स्कूल बंद होने पर वापस लौटकर आई। लेखिका मानती हैं कि अपनी धुन में मंजिल की ओर चलते जाने का और अकेलेपन का कुछ और ही मजा होता है।