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Revision Notes for Chapter 10 झाँसी की रानी Class 6 Vasant | Classrankers.com

झांसी की रानी

Revision Notes for Chapter 10 झाँसी की रानी Class 6 Vasant

CBSE NCERT Revision Notes

1

सार 1

Answer

इस कविता में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता का बखान किया गया है| यह कविता सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की परिस्थितियों की झलक देता है|

2

सार 2

Answer

अंग्रेज़ों के बढ़ते अत्याचार के खिलाफ और स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए भारत के राजाओं में हलचल हुई जिससे सिंहासन हिल गए। राजवंश अंग्रेजों पर गुस्सा हो गए। गुलामी के जंजीर में जकड़े जर्जर बूढ़े भारत में फिर से नया जोश का संचार हुआ। सभी राजा अपनी खोई हुई आजादी का मूल्य समझने लगे थे इसलिए उन्होंने फिरंगी यानी अंग्रेज़ो को भारत से भगाने का निश्चय कर लिया था। भारत की पुरानी तलवार सन् 1857 में चमक उठी। झाँसी की रानी उस युद्ध में वीर पुरुषों की भाँति लड़ी। उसकी यह कहानी हमने बुंदेलखण्ड के हरबोलों से सुनी थीं।

3

सार 3

Answer

लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहन थी जिनका बचपन का नाम छबीली था। वह अपने पिता की अकेली संतान थीं। उनका बचपन नाना साहब के साथ पढ़ते और खेलते बिता था। वह अपने उम्र की लड़कियों को सहेली नहीं बनाकर बरछी, ढाल, कृपाण को वह अपनी सहेली मानती थी। उन्हें शिवाजी जैसे वीरों की कहानियाँ जबानी याद थीं। कवयित्री कहती हैं कि हमने बुंदेले हरबोलों के मुँह से सुना है कि रानी लक्ष्मीबाई वीर पुरुषों की भाँति बहादुरी से लड़ी थीं।

4

सार 4

Answer

लक्ष्मीबाई को देखकर ऐसा लगता था कि मानो वह वीरता की अवतार लक्ष्मी या दुर्गा हैं| उनकी तलवारों की चोटें देखकर मराठे प्रसन्न होते थे। नकली युद्ध करना, चक्रव्यूह बनाना, खूब शिकार करना, शत्रु की सेना को घेरना, शत्रु के किले तोड़ना उनके प्रिय खेल थे। महाराष्ट्र की कुलदेवी भवानी लक्ष्मीबाई की आराध्य थीं।

5

सार 5

Answer

वीरांगना छबीली का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ तब वह रानी लक्ष्मीबाई बनकर झाँसी आ गई। राजमहल में बधाई के बाजे बजने लगे। उनके विवाह के अवसर पर झाँसी के राजमहल में बधाइयाँ बजीं और खुशियाँ छा गईं। मानो, वह झाँसी में वीर बुंदेलों की कीर्ति बनकर आ गई हो। ऐसा लगा जैसे चित्रा को वीर अर्जुन मिल गया या शिव से भवानी मिली हो।

6

सार 6

Answer

रानी के विवाह के बाद झाँसी का सौभाग्य जाग गया। महलों में प्रसन्नता का प्रकाश हो गया, किन्तु समय के साथ दुर्भाग्य के बादल भी घिर आए। दुर्भाग्य को तीर चलाने वाले हाथों का चूड़ियाँ पहनना अच्छा नहीं लगा और हाय रानी लक्ष्मीबाई विधवा हो गई। भाग्य को भी उन पर दया नहीं आई। राजा गंगाधर राव नि:संतान मर गए। रानी शोक में डूब गई।

7

सार 7

Answer

लक्ष्मीबाई विवाह के बाद जब झाँसी में आई तो वहाँ का सौभाग्य जाग गया| महलों में उजाला छा गया। किंतु हथियार उठाने वाले हाथों को चूड़ियाँ कब शोभा देती हैं? दुर्भाग्य को तीर चलाने वाले हाथों का चूड़ियाँ पहनना अच्छा नहीं लगा| राजा की मृत्यु हो गई और रानी विधवा हो गई। भाग्य को भी उन पर दया नहीं आई। राजा गंगाधर राव नि:संतान मर गए। रानी शोक में डूब गई।

8

सार 8

Answer

झाँसी का दीपक बुझ जाने पर अर्थात राजा के मर जाने पर अंग्रेज गवर्नर लॉर्ड डलहौजी को बड़ी प्रसन्नता हुई, क्योंकि उसे झाँसी का राज्य हड़पने का अच्छा अवसर मिल गया। उसने तुरन्त अपनी फौजें भेज झाँसी के किले पर अपना झंडा फहरा दिया। इस प्रकार उस वारिस रहित झाँसी के राज्य का वारिस ब्रिटिश राज्य बन गया।रानी ने आँसू भरकर देखा कि झाँसी उजड़ रही थी।

9

सार 9

Answer

जब अंग्रेजों ने झाँसी को अपने राज्य में मिलाया, तब रानी ने उनसे अनेक तरह से विनम्र प्रार्थना की परन्तु सब बेकार रहा। अंग्रेज़ जब भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में आए तो वे साधारण व्यापारी थे। उस समय वे यहाँ के राजाओं की दया चाहते थे। डलहौजी ने धीरे-धीरे अंग्रेजी शासन का विस्तार किया और धीरे-धीरे परिस्थितियाँ उनके पक्ष में आ गईं| जिन राजाओं और नवाबों से वे तब दया माँगते थे, उन्हीं को अंग्रेजों ने पैरों से ठुकराया है। अब अंग्रेज़ी राज्य की दासी थी और दासी के समान रहने वाली अंग्रेज़ी शासन की विक्टोरिया अब हमारे देश की महारानी बन गई थी यानी अंग्रेजी साम्राज्य पूरे भारत में फ़ैल गया।

10

सार 10

Answer

अंग्रेजों ने दिल्ली छीन ली और उस पर अपना अधिकार कर लिया। लखनऊ को भी उन्होंने जीत लिया। बिठूर के पेशवा बाजीराव को बंदी बना लिया गया तथा नागपुर पर भी घातक हमला हुआ। इसी प्रकार उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक आदि भी अंग्रेजों के सामने न ठहर सके। सिंध, पंजाब, म्यांमार (बर्मा) आदि का भी पतन हो गया। यही हालत बंगाल और मद्रास (चेन्नई) की भी हुई।

11

सार 11

Answer

जिन राजाओं के राजपाट छिने उनकी रानियाँ रनिवासों में रो रही थीं और जिन नवाबों की रियासत छिनी उनकी बेगमें भी बहुत दुखी थीं। उनके बहुमूल्य कपड़े और गहने कलकत्ता के बाजार में बिक रहे थे। अंग्रेजी अखबार नीलामी की खबरें सबके बीच पहुँचा रहे थे। नागपुर के जेवरों और लखनऊ के प्रसिद्ध नौलखे हार बाजारों में बिक रहे थे। वे गहने जो औरतों तथा रानियों की शोभा थे, पर्दे की इज्जत थे, दूसरों के हाथों बिक रहे थे।

12

सार 12

Answer

जब झाँसी पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया तो झाँसी को मुक्त कराने के लिए प्रयास होने लगे। जो कुटिया में रहते थे वे बहुत दुखी थे और महलों में रहने वाले भी अपमानित महसूस कर रहे थे। झाँसी के वीर सैनिकों के मन में अपने वीर पूर्वजों की वीरता का अभिमान भी था। वे अंग्रेजों से बदला लेने के लिए तैयार थे। नाना धुंधूपंत और पेशवा अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करने के लिए आवश्यक सामान जुटा रहे थे। उनकी बहन छबीली यानी रानी लक्ष्मीबाई ने भी राज्य की स्त्रियों में देवी दुर्गा के रणचंडी रूप को जागृत कर रही थी अर्थात् युद्ध का प्रशिक्षण देकर अपनी सेना में शामिल कर रही थी।  इस प्रकार सभी ने स्वतंत्रता रूपी यज्ञ में सोई हुई ज्योति को जगाने का निश्चय कर लिया था।

13

सार 13

Answer

अंग्रेजों से अपनी आजादी छीन लेने की बात महलों में आग की तरह फैल रहीं थीं तो साथ ही झोपड़ी यानी गरीब वर्ग में भी अंग्रेजों के प्रति गुस्सा था। आजादी प्राप्त करने का यह जोश, जुनून उनके हृदय से निकल रहा था। झाँसी और दिल्ली जाग चुकी थी तो लखनऊ में भी लोग अंग्रेजी सेना के विरुद्ध तैयार खड़े थे। मेरठ, पटना, कानपुर में आजादी प्राप्त करने की बात सबके दिलों में थी। जबलपुर और कोल्हापुर के लोगों में यह बात भरनी थी यानी उनको भी प्रेरित करना था।

14

सार 14

Answer

जब स्वतंत्रता रूपी महायज्ञ आरंभ हुआ तो अनेक वीर योद्धाओं ने अपना बलिदान दिया। इनमें नाना धुंधूपंत, ताँतिया, अजीमुल्ला-अहमद शाह मौलवी, कुर कुँवर सिंह जैसे वीर सैनिक थे। आजादी के इस महायज्ञ में कई वीरों को अपनी कुर्बानी देनी पड़ी। भारत की स्वतंत्रता के इतिहास रूपी आकाश में इनका नाम सूरज-चाँद की तरह हमेशा अमर रहेगा। उनकी इस कुर्बानी, त्याग और बलिदान को अंग्रेज जुर्म अर्थात् अपराध कहते थे।

15

सार 15

Answer

हम अन्य प्रदेशों की बातें छोड़कर झाँसी के मैदानों का दृश्य देखते हैं, जहाँ लक्ष्मीबाई मर्दो में मर्द बनी खड़ी है अर्थात् मर्दो से बढ़कर वीर योद्धा के रूप में लड़ रही थीं। अंग्रेजों की ओर से लेफ्टिनेंट वॉकर ने अपने जवानों के साथ झाँसी पर हमला किया। रानी ने भी उसका विरोध करने के लिए तलवार खींच ली अर्थात युद्ध की घोषणा कर दी थी। दोनों में भीषण युद्ध हुआ। धूल से आकाश ढक गया। अंग्रेज सेनापति घायल होकर भाग गया। उसे रानी की वीरता देखकर बहुत आश्चर्य हुआ।

16

सार 16

Answer

रानी झाँसी लगातार सौ मील की यात्रा करके कालपी आ गई। इतना सफ़र करने के कारण उनका घोड़ा थककर धरती पर गिर पड़ा और तुरन्त मर गया। वहाँ यमुना के किनारे फिर अंग्रेज़ रानी से हार गए। कालपी जीतकर रानी फिर आगे बढ़ी और उसने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया। ग्वालियर का राजा सिंधिया अंग्रेज़ों का मित्र था। उसे रानी से पराजित होकर राजधानी छोड़नी पड़ी।

17

सार 17

Answer

रानी की जीत हुई पर फिर से अंग्रेजों की सेना रानी को घेरती हुई आ पहुँची। इस बार सामने से आ रही टुकड़ी का नेतृत्व जनरल स्मिथ कर रहा था। उधर रानी के साथ उसकी दो सहेलियाँ काना और मंदरा भी आई थीं और उन्होंने युद्ध में बहुतसे शत्रुओं को मारा| परंतु तभी पीछे से यूरोज ने आकर आक्रमण कर दिया। इस प्रकार रानी दोनों ओर से घिर गई|

18

सार 18

Answer

लक्ष्मीबाई दोनों ओर से घिर जाने पर भी मार-काट करती हुई आगे बढ़ गई और सेना को पार करती हुई निकल गई। तभी अचानक सामने एक बहुत बड़ा नाला आ गया। रानी के लिए यह एक भारी संकट था। रानी का नया घोड़ा उसे पार न करने के लिए अड़ गया। इतने में पीछा करते हुए अंग्रेज सैनिक आ गए और दोनों ओर से वार पर वार होते चले गए। शेरनी-सी रानी घायल होकर गिर गई और वीरगति को प्राप्त हुई।

19

सार 19

Answer

रानी स्वर्ग सिधार गई अब उसकी अनोखी सवारी चिता ही थी। तेज-से-तेज मिल गया अर्थात रानी का आत्मरूपी तेज प्रभु के तेज से मिल गया। वह तेज की सच्ची अधिकारी भी थी। अभी वह केवल तेईस वर्ष की थी और तेईस वर्षों में उन्होंने जो वीरता दिखाई उससे लगता है वह मनुष्य नहीं कोई देवता थीं। वह स्वतंत्रता की देवी बनकर हमें जीवित करने आई थीं। वह हमें बलिदान का मार्ग दिखा गईं और जो सीख देनी थी दे गईं।

20

सार 20

Answer

कवयित्री कहती है कि रानी लक्ष्मीबाई, तुम तो स्वर्ग को जाओ परन्तु स्वतंत्रता आंदोलन  में आपके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। आपका यह बलिदान हमें कभी न नष्ट होने वाली आजादी के प्रति सचेत करता रहेगा। इतिहास चाहे कुछ भी न कहे और सच्चाई का गला घोंट दिया जाए| अंग्रेजों द्वारा विजय प्राप्त कर भी ली जाए या वे झाँसी को गोलों से नष्ट कर दें पर भारतवासी यह बलिदान नहीं भूल सकेंगे। हे रानी! तू अपना स्मारक स्वयं होगी यानी आप तो अपने आप में ही अपनी याद का चिह्न थी।

21

कठिन शब्दों के अर्थ-

Answer

• भृकुटी तानना - क्रोध करना
• गुमी हुई - खोई हुई
• फिरंगी - विदेशी (अंग्रेज़)
• मन में ठानना - पक्का इरादा करना
• हरबोले - हर व्यक्ति के मुँह से
• कृपाण - तलवार
• अवतार - विशेष रूप से जन्म लेना
• पुलकित - प्रसन्न
• व्यूह-रचना - मोर्चा बनाना
• दुर्ग तोड़ना – किला तोड़ना
• खिलबाड़ - खेल
• भवानी  -पार्वती
• सुमट - अच्छे वीर
• विरुदावलि - प्रशंसा की कहानी
• उदित हुआ - जगा
• मुदित - प्रसन्न
• कालगति - मृत्यु की चाल
• काली घटा घेर लाना - मुसीबतें आना
• अश्रुपूर्ण - आँसुओं से भरे हुए
• बिरानी - पराई
• अनुनय-विनय - प्रार्थना
• विषम - कठिन
• पैर पसारना - विस्तार करना
• काया पलटना - बदलाव आना
• घात - आक्रमण
• कौन बिसात - क्या औकात
• वज्र नियात - करारी चोट
• बेजार - पीड़ित
• सरेआम - सबके सामने
• नौलखा - बहुमूल्य हार
• रणचंडी - दुर्गा का एक रूप
• आह्वान - पुकारना
• अंतरतम - हृदय
• चेती - जाग्रत हो गई
• लपटें छाना - भयंकर रूप से फैल जाना
• उकसाना - प्रेरित करना
• अभिराम - सुन्दर
• मुँह की खाना - हारना,
• वीर गति पाना - युद्ध में शहीद होना
• दिव्य - अलौकिक
• मदमाती - मस्त करने वाली
• अमिट - न मिटने वाली।